
देहरादून। उत्तराखंड में रहने वाले परिवारों का सरकारी रिकॉर्ड अब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देवभूमि परिवार पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से राज्य के प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट परिवार पहचान संख्या (फैमिली आईडी) प्रदान की जाएगी। पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया आगामी 9 नवंबर से शुरू होगी।सरकार की इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य प्रदेश के परिवारों से संबंधित विभिन्न सरकारी विभागों के रिकॉर्ड को एकीकृत करना और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक आसानी से पहुंचाना है। परिवार पहचान संख्या के माध्यम से सरकार के पास प्रत्येक परिवार का एक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी हो सकेगी।मूल निवासियों के साथ 15 साल से रह रहे नागरिक भी होंगे शामिल देवभूमि परिवार पोर्टल की खास बात यह है कि इसका लाभ केवल उत्तराखंड के मूल निवासियों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य में पिछले 15 वर्षों से निवास कर रहे नागरिकों को भी इस व्यवस्था के दायरे में शामिल किया जाएगा। इससे प्रदेश में लंबे समय से रह रहे परिवारों को भी डिजिटल परिवार पहचान उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा।सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना होगा आसान सरकार का मानना है कि अलग-अलग विभागों में बिखरे परिवारों के रिकॉर्ड एक प्लेटफॉर्म पर आने से योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान आसान होगी। साथ ही एक ही जानकारी को बार-बार उपलब्ध कराने की आवश्यकता कम होगी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।इस व्यवस्था से सरकार को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि किस परिवार को किन सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है और कौन से पात्र परिवार अभी योजनाओं से वंचित हैं।डेटा सुरक्षा भी होगी बड़ी चुनौती हालांकि, देवभूमि परिवार पोर्टल के माध्यम से बड़ी संख्या में नागरिकों की व्यक्तिगत और पारिवारिक जानकारी डिजिटल रूप में एकत्र की जाएगी। ऐसे में डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होगी। नागरिकों की निजी जानकारी का सुरक्षित रखरखाव, अनधिकृत पहुंच पर रोक और डेटा के उचित इस्तेमाल को सुनिश्चित करना सरकार के सामने अहम जिम्मेदारी होगी।